Tuesday, March 8, 2011

कतरन-3

सूरज की पहली किरण पड़ने के पहले ही
बता दिया कबूतर ने गुटुर गुटुर करते बालकनी में
निकलना होगा सवेरे ही जीवन की तलाश में

माँ,
बंद करो खिड़की, 
कबूतर चिल्ला रहे हैं
अच्छा सपना देख रहा था टूट गया !!

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मैं

जिस्म के अन्दर पनपते सपनों के आगे और  जिस्म के बाहर सपनों के पीछे दौड़ते-भागते सांसें कभी...