Tuesday, March 8, 2011

कतरन-4

सोचा था पंख फैला कर अपने
नाप लूँगा सारा आसमान
मगर यहाँ तो पंख खोलने भर की जगह नहीं

मुंबई बहुत बड़ा शहर  है !!

2 comments:

jimmy said...

shahar to khud chota sa hai mumbai ko mahanagar hi raas aayega.......

thinkinthrutheeye said...

an irony nicely put :)

मैं

जिस्म के अन्दर पनपते सपनों के आगे और  जिस्म के बाहर सपनों के पीछे दौड़ते-भागते सांसें कभी...