Tuesday, March 8, 2011

कतरन-1

कितना आसान है
सपने की तरह
ज़िन्दगी को जीना.

कितना कठिन है
दवा की तरह
ज़िन्दगी के कड़वे घूंट पीना.

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मैं

जिस्म के अन्दर पनपते सपनों के आगे और  जिस्म के बाहर सपनों के पीछे दौड़ते-भागते सांसें कभी...